आईएएस प्रशिक्षुओं में राष्ट्रसेवा, संवेदनशीलता और सुशासन का भाव सर्वोपरि हो: राज्यपाल

Uttarakhand News

देहरादून। उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) 2024 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) की गरिमामयी उपस्थिति रही।

राज्यपाल ने व्यावसायिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर सभी अधिकारी प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल, सार्थक एवं राष्ट्रसेवा को समर्पित सेवाकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अकादमी में प्रशिक्षण का एक अध्याय आज पूरा हो रहा है, लेकिन राष्ट्रसेवा की वास्तविक और महत्वपूर्ण यात्रा अब शुरू हो रही है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासन की वास्तविक परीक्षा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में होती है, जब समय सीमित हो, जानकारी अधूरी हो और निर्णय का प्रभाव व्यापक हो। ऐसी परिस्थितियों में नियम मार्गदर्शन देते हैं और अनुभव सहायता करता है, लेकिन सही निर्णय के लिए विवेक, निष्पक्षता और दूरदृष्टि आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि भारत आज परिवर्तन के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए अधिकारियों को नीतियों के साथ-साथ जमीनी वास्तविकताओं और नागरिकों की आकांक्षाओं को समझना होगा। उन्होंने अधिकारी प्रशिक्षुओं का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि गांवों, कस्बों, शहरों और सामान्य नागरिक के जीवन में देखें।

उन्होंने कहा कि फाइलें तथ्य उपलब्ध कराती हैं, लेकिन फील्ड वास्तविकता से परिचित कराता है। अधिकारियों को लोगों के बीच जाना चाहिए, उनकी बात सुननी चाहिए और उनकी कठिनाइयों को समझना चाहिए। प्रशासन का पहला धर्म जनता की बात सुनना और उसके विश्वास को बनाए रखना है।

राज्यपाल ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा साइंस और नई तकनीक प्रशासन की कार्यक्षमता एवं निर्णय क्षमता को नई शक्ति प्रदान कर रही हैं। अधिकारियों को इन तकनीकों को सीखना, अपनाना और स्वयं को निरंतर अद्यतन रखना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि अधिकारी अपने सेवाकाल में अनेक अवसरों और चुनौतियों का सामना करेंगे। हर परिस्थिति में राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का भाव उनके भीतर जीवित रहना चाहिए। यही भावना उन्हें पद से ऊपर उठाकर सच्चा राष्ट्रसेवक बनाएगी।

उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से निकलते समय अधिकारी प्रशिक्षु केवल सक्षम प्रशासक ही नहीं, बल्कि ऐसे राष्ट्रसेवक बनें, जिनकी कार्यशैली में पारदर्शिता, व्यवहार में संवेदना, निर्णयों में दृढ़ता और हृदय में सदैव राष्ट्र प्रथम का भाव हो। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गणेश जोशी, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी के निदेशक डॉ. बी. राजेंदर एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *